जेल में बंद है शाहीन बाग में प्रदर्शन करने वाली ये लड़की, प्रेग्नेंसी पर लोगों ने किए भद्दे कमेंट, जानें सच

जेल में बंद है शाहीन बाग में प्रदर्शन करने वाली ये लड़की, प्रेग्नेंसी पर लोगों ने किए भद्दे कमेंट, जानें सच....




<p>जामिया मिल्लिया की स्टूडेंट सफ़ूरा ज़रगर को लेकर &nbsp;ट्विटर पर जो पोस्ट डाली गईं, उनमें उन्हें शाहीन बाग में दंगा भड़काने वाला बताया गया। वहीं, यह भी कहा गया कि कोरोना टेस्ट में ये दो महीने की प्रेग्नेंट निकलीं। उन भद्दा कमेंट करते हुए कहा गया कि इसे यानी प्रेग्नेंसी को ऊपर वाले की देन मत बताना।&nbsp;</p>


<p>सोशल एक्टिविस्ट्स और आंदोलनकारियों को पहले भी ट्रोलर सोशल मीडिया पर निशाना बनाते रहे हैं। उन्हें घटिया और शर्मनाक कमेंट्स का सामना करना पड़ता है। ऐसे लोगों पर व्यक्तिगत हमले बढ़ जाते हैं। सफ़ूरा ज़रगर के मामले में जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष शेहला राशिद ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि प्रेग्नेंट होने वाली महिला शादीशुदा है या नहीं।&nbsp;</p>


<p>कुछ लोगों का मानना है कि अल्पसंख्यक समुदाय की होने और शाहीन बाग के आंदोलन में बढ़-चढ़ कर भाग लेने के कारण ज़रगर पर इस तरह के घटिया कमेंट किए जा रहे हैं। इस तरह से उनका चरित्र हनन करने की कोशिश की जा रही है। यह सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल है, लेकिन ट्रोलर्स ऐसा पहले से ही करते रहे हैं।<br /> &nbsp;</p>


<p>यहां यह जानना जरूरी है कि सोशल मीडिया पर उनके अविवाहित होने के जो दावे किए जा रहे हैं, वे पूरी तरह से गलत हैं। उनकी शादी 2018 में ही हो चुकी है। मीडिया के लोगों ने उनके पति से बात की है। कोई भी इसके बारे में तथ्यात्मक जानकारी हासिल कर सकता है।</p>


<p>जेल जाने के पहले ही उनकी प्रेग्नेंसी के बारे में पता&nbsp;चल चुका था। अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 10 फरवरी को पुलिस और स्टूडेंट्स के बीच हुए एक विवाद के दौरान ज़रगर घायल हो गई थीं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तभी उनकी प्रेग्नेंसी के बारे में उनके पति ने डॉक्टरों को बतलाया था। कोरोना महामारी फैलने के बाद उन्होंने घर से निकलना बंद कर दिया था। सिर्फ जरूरी काम से ही वे कभी-कभी बाहर निकलती थीं।&


<p>10 अप्रैल को गिरफ्तारी के बाद ही ज़रगर ने बताया था कि वे 3 महीने की प्रेग्नेंट हैं और इसी आधार पर जमानत के लिए अर्जी भी दी थी। 21 अप्रैल को अदालत में उनकी जमानत के लिए एक और अर्जी दी गई, जिसमें उनकी मेडिकल कंडीशन के बारे में जानकारी दी गई है और 3 महीने की प्रेग्नेंट बताया गया है।&nbsp;</p>


<p>ज़रगर के खिलाफ सोशल मीडिया पर जो प्रचार किया जा रहा है और उनके चरित्र पर लांछन लगाया जा रहा है, उसे लेकर महिला अधिकार कार्यकर्ता और वकील वृंदा ग्रोवर का कहना है कि अब यह जानकारी सार्वजनिक हो गई है कि ज़रगर शादीशुदा हैं। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर पोस्ट कर के उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। ऐसा शाहीन बाग आंदोलन के विरोधी और असामाजिक तत्व कर रहे हैं।&nbsp;<br /> &nbsp;</p>

नई दिल्ली। जामिया मिलिया इस्लामिया की लॉ की स्टूडेंट सफ़ूरा ज़रगर को गैरकानूनी गतिविधि रोकने के कानून के तहत 10 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया। सफ़ूरा ज़रगर पर गैर जमानती धाराओं में मामला दर्ज किया गया। ज़रगर को तिहाड़ जेल में रखा गया है। जेल में जब उनकी कोरोना जांच की गई तो वे प्रेग्नेंट पाई गईं। इसके बाद उन पर व्यक्तिगत हमले बढ़ गए। सोशल मीडिया पर उन्हें अविवाहित बता कर उनके चरित्र पर लांछन लगाया जाने लगा। सफ़ूरा ज़रगर नागरिकता संशोधन विधेयक  CAA के विरोध में चले आंदोलन में काफी सक्रिय रही थीं। उन्होंने शाहीन बाग में चले लंबे धरने और विरोध प्रदर्शनों में जम कर हिस्सा लिया था और उसका नेतृत्व किया था। उनके प्रेग्नेंट होने के बाद ट्विटर पर विवाहित बता कर उन पर कीचड़ उछाला जा रहा है। उनके खिलाफ इस तरह की पोस्ट की बाढ़ आ गई है। क्या ज़रगर अविवाहित हैं? जानें क्या है इसके पीछे की सच्चाई।
ये कंटेंट UC के विचार नहीं दर्शाता है

दहेज कम मिलने से नाराज था आर्मी जवान, शराब के नशे में ये काम किया पत्नी के साथ..........

दहेज कम मिलने से नाराज था आर्मी जवान, शराब के नशे में ये काम किया पत्नी के साथ..........
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बालोद. एक महिला ने अपने आर्मी जवान पति पर दहेज प्रताडऩा का आरोप लगाया है। पत्नी का आरोप है कि उसका पति दहेज के लिए मारपीट भी करता है जिससे वह परेशान रहती है। महिला की शिकायत पर डौंडीलोहारा पुलिस, पति के खिलाफ धारा 498 के तहत मामला दर्ज कर जांच में जुट गई है।
शिकायतकर्ता महिला, पति धनसिंह कोवाची (27) ग्राम नलपानी की रहने वाली है। उन्होंने बताया कि उसका विवाह 2017 में सामाजिक रीति रिवाज के साथ धनसिंह कोवाची के साथ हुआ। उसका मायका टिकरापारा बालोद है। विवाह के बाद से ससुराल ग्राम नलपानी में अपने सास-ससुर के साथ रहती हूं। विवाह के बाद अक्टूबर 2017 से पति उससे दहेज के नाम पर लगातार मारपीट करता है।
जान से मारने की कोशिश की
मायके की ओर से दिए गए सोने के मंगलसूत्र, सोने की रिंग और चेन को भी बेच दिया है। जब मैं कहती हूं कि शादी में बहुत खर्च किया है तो कहां से देंगे, तब मारपीट करते है। पति जब भी छुट्टी में घर आते हैं तो शराब पीकर मारपीट करते हैं।
2 अप्रैल 2020 को रात में पति ने उसका गला दबाने की कोशिश की। मारपीट के दौरान गले और सिर में चोट लगी है। पुलिस ने महिला की शिकायत पर जांच शुरू कर दी है।
And then you should

पालघर में मारे गए संत का आखिरी संदेश हुआ वायरल, जाति व्यवस्था पर की थी चोट

पालघर में मारे गए संत का आखिरी संदेश हुआ वायरल, जाति व्यवस्था पर की थी चोट




नई दिल्ली टीम डिजिटल। पालघर में 200 लोगों की भीड़ के जानलेवा हमले के बाद दम तोड़ने वाले महंत कल्पवृक्ष गिरी समेत तीन लोगों की दुखद मौत के बाद से इस मुद्दे पर सियासत तेज होती जा रही है। बुधवार को ठाकरे सरकार ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों की सूची जारी करते हुए दावा किया है हमलावरों में दूसरे समुदाय का कोई व्यक्ति नहीं था। ऐसे में स्वामी कल्पवृक्ष के नाम से जारी की गई वीडियो तेजी से वायरल होती जा रही है।
यह वही संत ह जिन्हें पालघर में घेर कर मार दिया गया😠😠#वीडियो सुनिए
आपको समझ मे आ जाएगा कि ये संत हमारे लिए कितने जरूरी थे और यही वजह इनकी मौत का कारण बन गयी😢
इनकी मृत आत्मा को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करना हमारी और आपकी जिम्मेदारी ह
जागो हिन्दू जागो pic.twitter.com/Kfr35Gxbeq

— Dev Jakhar (@JakhatDev) April 21, 2020
अभी तक वीडियो की पुष्टी नहीं, सत्यता पर संदेह बरकरार
समाचार लिखे जाने तक वीडियो की पुष्टी नहीं की जा सकी है। वीडियो में दिख रहे स्वामी की शक्ल महंत कल्पवृक्ष गिरी से मिलती है मगर महंत कल्पवृक्ष गिरी की किसी तस्वीर में त्रिशूल के आकार का त्रिपुंड नहीं लगा हुआ है। लिहाजा इस वीडियो की सत्यता पर संदेह बरकराह है।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है वीडियो
इस वीडियो में महंत कल्पवृक्ष गिरी लोगों से आत्मरक्षा के साधन रखने, समाज में एकता बनाए रखने और हिंदुओं में जाति व्यवस्था के भेदभाव को दूर करने का संदेश देते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि वीडियो में भी उनका नाम कहीं नहीं बोला गया है, इसलिए सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होती जा रही इस वीडियो पर संदेह भी किया जा रहा है।
क्या महंत ने मरने से पहले ही कर दिया था खतरे के प्रति आगाह
वहीं कई यूजर कमेंट कर रहे हैं कि महंत कल्पवृक्ष गिरी ने मरने से पहले ही समाज को खतरे से आगाह किया था। मगर खुद उनकी रक्षा करने में समाज विफल रहा। अलबत्ता इतनी आक्रामक हिंसक भीड़ के हाथों वृद्ध महंत कल्पवृक्ष गिरी की निर्दय मृत्यू के बाद से मिले-जुले रिएक्शन्स सामने आ रहे हैं।
केस बंद मगर सियासत जोरों पर
उनकी मौत की वीडियो में ‘शोएब बस’ की आवाज सुनाई दे रही है। मगर अब दावा किया जा रहा है कि ये अवाज ‘ओए बस’ है। अब खुद महाराष्ट्र के गृह मंत्री दावा कर रहे हैं कि इस फेहरिस्त में कोई दूसरे संप्रदाय का व्यक्ति नहीं है। मगर सियासत अभी भी जोरों पर है और लोग महाराष्ट्र सरकार के इस दावे से संतुष्ट नहीं हैं।

बहुत ही अशुभ संकेत दे रहा है इस दिन होने वाला सूर्य ग्रहण आखिर क्या है सच......?

बहुत ही अशुभ संकेत दे रहा है इस दिन होने वाला सूर्य ग्रहण
आखिर क्या है सच......?



इंटरनेट डेस्क। इस समय देश कोरोना वायरस का कहर झेल रहा है। इसके कारण देश में 23 हजार से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। लॉकडाउन के बावजूद ये आंकड़ा भारत में लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच अब 21 जून, 2020 को सूर्य ग्रहण होने जा रहा है। कुछ ज्योतिषाचार्य इसे अच्छा संकेत नहीं मान रहे हैं।



ज्योतिष गणना के अनुसार इन दिन लोगों को संभलकर रहने की जरूरत है। वहीं देश-दुनिया के लिए भी इसे अच्छा नहीं माना जा रहा है। एक ज्योतिष पंडित के अनुसार 21 जून, 2020 को होने वाले इस सूर्य ग्रहण के प्रभाव स्वरूप देश व दुनिया में पड़ोसी राष्ट्रों के आपसी तनाव, अप्रत्यक्ष युद्ध, महामारी फैल सकती है। वहीं इसके कारण किसी बड़े नेता की हानि, राजनीतिक परिवर्तन, हिंसक घटनाओं में इजाफा, आर्थिक मंदी आदि पनपने के संकेत मिल रहे हैं।




बताया जा रहा है कि यह ग्रहण देश में खंडग्रास रूप में नजर आएगा। भारतीय मानक समयानुसार ग्रहण का आरंभ दिन में 10.42 बजे से होगा। जबकि इसका मोक्ष दोपहर 2. 7 मिनट पर होगा। इस सूर्य ग्रहण की अवधि तीन घंटे की रहेगी।

आखिर अमित शाह ने कर ही दिया वो ऐलान, जिसका देश के मुस्लिम कर रहे थे इंतजार, बोले एक भी...

आखिर अमित शाह ने कर ही दिया वो ऐलान, जिसका देश के मुस्लिम कर रहे थे इंतजार, बोले एक भी...




यह तो आप सभी जानते हैं कि जब से मोदी सरकार की तरफ से NRC और CAA की बात कही गई है तभी से पूरे देश के मुसलमानों में हलचल पैदा हो गई है। यह हलचल सिर्फ मुसलमानों में ही नहीं बल्कि सभी धर्म के लोगों में देखी जा रही है।



नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में पहले तो दिल्ली के शाहीन बाग में लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन बाद में दिल्ली में हिंसा भड़क उठी। नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वाले और समर्थन करने वाले लोग आपस में भिड़ गए जिसका नतीजा यह हुआ कि इस हिंसा में 42 लोगों की मौत हो गई।


लेकिन अब नागरिकता संशोधन कानून पर अमित शाह का एक बड़ा बयान सामने आया है। दरअसल उड़ीसा के भुवनेश्वर में अमित शाह एक रैली को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी हाल में देश के एक भी मुसलमान की नागरिकता सीएए के कारण नहीं जाने देंगे। उन्होंने अपनी बात फिर से दोहराई कि यह बिल नागरिकता छीनने के लिए नहीं बल्कि नागरिकता देने के लिए बनाया गया है।

कोरोना संकट में पाकिस्तान की नई चाल, आतंकियो को बचाने के लिए किया ये कांड

कोरोना संकट में पाकिस्तान की नई चाल, आतंकियो को बचाने के लिए किया ये कांड


पाकिस्तान ने फिर उट-पटांग हरकत शुरू कर दी है।  जब सारी दुनिया कोरोना से जूझ रहा है। पाकिस्तान अपनी हरकतों से दुनिया का ध्यान खींचने की कोशिश कर रहा हैं। मतलब ये कि  इमरान सरकार ने ने अपनी निगरानी सूची में से मुंबई अटैक के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा आतंकी जकीउर रहमान लखवी समेत करीब चार हजार आतंकियों के नाम हटा दिए हैं।

नई दिल्ली:  पाकिस्तान ने फिर उट-पटांग हरकत शुरू कर दी है।  जब सारी दुनिया कोरोना से जूझ रहा है। पाकिस्तान अपनी हरकतों से दुनिया का ध्यान खींचने की कोशिश कर रहा हैं। मतलब ये कि  इमरान सरकार ने ने अपनी निगरानी सूची में से मुंबई अटैक के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा आतंकी जकीउर रहमान लखवी समेत करीब चार हजार आतंकियों के नाम हटा दिए हैं। इस काम को उसने बीते 18 माह के दौरान अंजाम दिया है।
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कोई वजह भी नहीं बताई
मुंबई हमले में 166 लोगों की मौत हो गई थी जिनमें कुछ विदेशी नागरिक भी शामिल थे। पाकिस्‍तान ने ऐसा करने की कोई वजह भी नहीं बताई है। पाकिस्‍तान की तरफ से ये कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब जून में एफएटीएफ  (FATF) की संभावित बैठक हो सकती है जिसमें ये देखा जाएगा कि जिन 27 बिंदुओं पर पाकिस्‍तान से एक्‍शन लेने के लिए कहा गया था वो लिए गए या नहीं। एफएटीएफ द्वारा फरवरी में हुई बैठक में उसको जून तक का समय दिया गया था। इसमें कहा ग या था कि यदि पाकिस्तान इन मानकों पर खरा नहीं उतरता तो उसे ब्लैक लिस्ट किया जा सकता है।एफएटीएफ इस साल जून में पाकिस्‍तान के मनी लॉन्ड्रिंग से 27 बिंदुओं पर लिए एक्‍शन की समीक्षा करने वाला है।  विशेषज्ञों के अनुसार एफएटीएफ( FATF)  में ब्लैकलिस्ट होने से बचने के लिए इमरान सरकार ने ये चाल चली है। अमेरिकी सरकार में पूर्व पॉलिसी एडवाइजर रह चुके पीटर पैटेटस्‍की के मुताबिक अंतरराष्‍ट्र‍ीय मानक यह है कि अगर वॉच लिस्‍ट से आतंकवादियों का नाम हटाया जाता है तो तुरंत उसकी सूचना तत्‍काल वित्‍तीय क्षेत्र को देनी होती है। पाकिस्‍तान ने संदिग्‍ध आतंकवादियों के नाम हटाते समय ऐसा नहीं किया है।
1800 आतंकियों के नाम हटाए
इमरान खान ने भी सत्ता में आने के बाद से अभी तक 1800 आतंकियों के नाम इस लिस्ट से हटा दिये हैं। इमरान ने ही मुंबई हमले के मास्टरमाइंड माने जाने वाले लश्कर के कमांडर जकी उर रहमान लखवी का नाम लिस्ट से बाहर किया है। (FATF) के मुताबिक अक्टूबर 2018 तक इस लिस्ट में कुल 7,600 नाम थे जो अब घटकर 3800 रह गए हैं। इमरान ने 9 मार्च को सरकार में आने के बाद से 27 तक एक झटके में 1,069 नाम इस लिस्ट से हटा दिए। 27 मार्च के बाद से सभी तक अलग-अलग मौकों पर 800 और नाम इस लिस्ट से हटाए गए।
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रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्‍तान के गृह मंत्रालय के अधिकारी ताहिर अकबर अवन ने कहा है कि संदिग्‍ध आतंकवादियों की संख्‍या बहुत ज्‍यादा थी और इसमें कई गड़बड़ियां भी थीं। उनके मुताबिक इस सूची में अब तक उनके नाम भी शामिल थे जिनकी मौत हो चुकी है। इसके अलावा इसमें वो नाम भी शामिल थे जो किसी प्रतिबंधित गुट के सदस्‍य नहीं थे। एफएटीएफ की बैठक से पहले पाकिस्‍तान का ये कदम शायद इसलिए भी उठाया गया हो क्‍योंकि कोरोना महामारी की वजह से इस बैठक पर संकट के बादल हैं